शनिवार, 5 फ़रवरी 2022

वाणी-विनय.

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कल्याणमयी माँ ,भारति हे ,शुभ श्रेय-प्राप्ति वर दो! 

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उज्ज्वल तन, धवल ज्ञान-दीपित,दिव्यता-बोधमय दृष्टि प्रखर;

हे सकल कला-विद्या धारिणि, तुमसे ही दिशा-दिशा भास्वर.

 हो ताप-क्लेश-दुख  शमित,  राग-रस से सिंचित कर दो!

शुभ श्रेय-प्राप्ति वर दो! 

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ज्योतित स्वरूप उजियारा भर, कर दे विलीन तम का कण-कण; 

शतदल मकरन्द अमन्द धरे, धरती-नभ हो आनन्द मयम् .

वाणी,विशुद्ध संधानमयी, वे अमल-सरल स्वर दो !

शुभ श्रेय-प्राप्ति वर दो! 

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 अवतरो देवि ,जग-जीवन में, कण-कण  मुखरित हों गान रुचिर ;

अग-जग झंकृत हो पुण्य-राग, प्राणों में जागे ज्योति प्रखर .

जागें संस्कार सुभग,गति-मति निर्मला, कलुष-हर हो !

शुभ श्रेय-प्राप्ति वर दो! 
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9 टिप्‍पणियां:

  1. अभिमंत्रित ऋचाओं की प्रखर ज्योति। शुभ वर फलित हो।

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  2. निरोगी तन, क्लेश मुक्त मन, निर्मल बुद्धि, विशुद्ध वाणी और सारे धरती-आकाश के लिए आनंद की कामना, माँ सरस्वती से कितनी सुंदर प्रार्थना की है आपने!

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  3. अत्यंत सुंदर आंटी जी। बचपन की सरस्वती शिशु मंदिर की प्रार्थना याद आ गई - या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रा वृता...

    अतुल श्रीवास्तव

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  4. अहा ... देर से आना हुआ ..... लेकिन वरदान तो मिलेगा न ? ..... बहुत सुन्दर ..

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  5. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(०८-०४ -२०२२ ) को
    ''उसकी हँसी(चर्चा अंक-४३९४)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  6. बहुत सुन्दर प्रार्थना !
    लेकिन अब समय आ गया है कि प्रार्थना-याचना-अरदास से ऊपर उठ कर हम स्वयं अपने भाग्य का निर्माण करें !

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  7. बहुत ही सार्थक सुंदर निवेदन ।
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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