सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

चन्दन क फूल -

*

चँदन केर बिरवा मइया तोरे अँगना
कइस होई चँदन क फूल !
*
कनिया रहिल माई बाबा से कहलीं ,
चलो, चलो मइया के दुआर !
केतिक बरस बीति गइले निहारे बिन
दरसन न भइले एक बार !
हार बनाइल मइया तोहे सिंगारिल ,
चुनि-चुनि सुबरन फूल !
*
जइहौ हो बिटिया, बन के सुहागिनि ,
ऐतो न खरच हमार ,
आपुनोई घर होइल आपुन मन केर
होइल सबै तेवहार !
बियाहै गइल , परबस भइ गइली ,
रे माई तू जनि भूल !
*
ना मोर पाइ धरिल एतन बल ,
ना हम भइले पाँखी !
कइस आइल एतन दूरी हो
कइस जुड़ाइल आँखी !
कोस-कोस छाइल गमक महमही ,
पाएल न चँदन क फूल !
*
आपुनपो लै लीन्हेल गिरस्थी,
अब मन कइस सबूरी !
चँदन फूल धरि चरन परस की -
जनि रह आस अधूरी !
विरवा चँदन ,गाछ बन गइला
मइया अरज कबूल !
*

23 टिप्‍पणियां:

  1. बसन्त पंचमी की शुभकामनाएँ ।
    इस रचना को समझने की कोशिश तो की है ।बस चंदन के फूल सी आपकी याद महकने लगी ।

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज मंगलवार 16 फरवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत सुन्दर मनमोहक लोकगीत..माँ बेटी के विछोह का सुन्दर शब्द चित्र..लोक परम्परा को सहेजे आपकी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएं..

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  4. चंदन के वृक्ष और मायके से दूर बेटी को उसके फूलों की याद दिलाती लोक भाषा में लिखी सुंदर रचना !

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  5. अहा अति सुंदर मनभावन सरस शीतल सृजन।
    लुप्तप्राय चंदन के फूल की तरह खूबसूरत और मन को ठंडक प्रदान करती लोकगीत।।
    सादर।

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  6. चन्दन, माँ पुत्री का एहसास और बहुत कुछ समेटे आंचलिक भाषा का आनंद समेटे एक सुन्दर भावपूर्ण रचना ... वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें ...

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-02-2021) को  "बज उठी वीणा मधुर"   (चर्चा अंक-3980)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  8. बसंत पंचमी की शुभकामनाएं सुंदर सृजन

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  9. माँ-बेटी के मन के भावों का लोक-भाषा बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीया प्रतिभा जी,सादर नमस्कार आपको

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  10. आज भी गाँव में गीत की ऐसी मधुरता सुनने को मिल जाती है । अति सुन्दर ।

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  11. अमृता जी के कथन ने मेरे मन की बात कह दी..वास्तव में ऐसी मधुरता हम खोते जा रहे हैं..आपका धन्यवाद ऐसा सुंदर गीत देने के लिए..

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  12. अति सुंदर, मनभावन, हृदय-विजयी लोकगीत । शब्द-शब्द में मिट्टी की गंध है ।

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  13. बहुत ही सुंदर रचना , माँ बेटी के बीच के प्रेम को दर्शाती हुई,लोकगीत मे मिट्टी की खुशबू होती हैं ।सादर नमन, बहुत बहुत बधाई हो आपको

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  14. वाह क्या बात है,
    आपकी रचनाओं की प्रतीक्षा रहती है।
    ..... शुभकामनाएं।

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