कठपुतली !
इंगित पर नाचती ,
डोरियों से बँधी
झूमती है मंच पर.
बाजीगर के इशारे -
खिंचती डोरियाँ
नाचती है ,
लोगों का मन बहलाने !
*
पुतली ? अलंकरणों से सजी
रिझायेगी जन-मन .
संवेदना तरल हृदय
बुद्धि की तेजस्विता ,
नारीत्व का प्रखर चेत
अपना सत्व,अपनी गरिमा
कहां से लाएगी कठपुतली ?
*
रीढ़ ही नहीं जब
कैसे थिर हो
कैसे जम कर खड़ी हो
बोध कैसे जागे अपना ,
अपने ही गर्भ-जन्मी पीढ़ियों का !
*
इस मंच का खेल खत्म होगा एक दिन ,
फीकी बेरंग , दाग़दार बनी,
फ़ालतू कबाड़ में
डाल दी जाएगी कठपुतली !
*
इंगित पर नाचती ,
डोरियों से बँधी
झूमती है मंच पर.
बाजीगर के इशारे -
खिंचती डोरियाँ
नाचती है ,
लोगों का मन बहलाने !
*
पुतली ? अलंकरणों से सजी
रिझायेगी जन-मन .
संवेदना तरल हृदय
बुद्धि की तेजस्विता ,
नारीत्व का प्रखर चेत
अपना सत्व,अपनी गरिमा
कहां से लाएगी कठपुतली ?
*
रीढ़ ही नहीं जब
कैसे थिर हो
कैसे जम कर खड़ी हो
बोध कैसे जागे अपना ,
अपने ही गर्भ-जन्मी पीढ़ियों का !
*
इस मंच का खेल खत्म होगा एक दिन ,
फीकी बेरंग , दाग़दार बनी,
फ़ालतू कबाड़ में
डाल दी जाएगी कठपुतली !
*