शुक्रवार, 9 मार्च 2018

तेरा राम रखैया...

*       सबकी चीत भलाई प्यारे ,तेरा राम रखैया,

 कहाँ टिका जीवन का पानी लहर लहरती कहती,

चलता आना-जाना उड़ते पत्ते उड़ते पत्ते नदिया बहती 
जड़-जंगम को नाच नचावे नटखट रास-रचैया .

जो बीजा सो काटेगा रे  कह गये बूढ़ पुरनिया,

चक्कर काटेगा कितने ही  यही रहेगी दुनिया. 
स्वारथ ही सूझे  ऐसा भी स्याना मत बन भैया.

सिर कितना उधार का बोझा ,निपटे उतना अच्छा, 

लोभी मन का कौन ठिकाना लेता राम परीच्छा.
कुछ विचार ले ,कुछ सँवार चल, उड़ मत बन कनकैया.  
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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

विनती -

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कृष्ण ,तुम्हारे श्री-चरणों में , मेरे  गुण औ दोष समर्पित !

जनम भटकते बीता,अब बस इतना करो कि मिटें द्विधायें,
यह गठरी अब  तुम्हीं सँभालो,  करो वही जो तुम्हें सुहाये ,
किया-धरा सब तुम्हें सौप  हों जायें राग-विराग विसर्जित !

क्षमता इतनी दो कि निभा जाऊं जो कुछ हिस्से में आया ,
 डोर तुम्हीं से संचालित ये सभी तुम्हारा रास रचाया ,
मेरे भाव-अभाव तुम्हारे , तुमसे रचित  तुम्हीं से प्रेरित !

अंतर्यामी ,तुम ही समझो  मेरा कौन और, जो जाने ,
परखनहारे ,तेरे आगे  टिक पाये कब कौन बहाने .
दोनों खाली हाथ जोड़,बढ़ जाऊं आगे हो कर थिर-चित् !
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- प्रतिभा.