शुक्रवार, 9 मार्च 2018

तेरा राम रखैया...

*       सबकी चीत भलाई प्यारे ,तेरा राम रखैया,

 कहाँ टिका जीवन का पानी लहर लहरती कहती,

चलता आना-जाना उड़ते पत्ते उड़ते पत्ते नदिया बहती 
जड़-जंगम को नाच नचावे नटखट रास-रचैया .

जो बीजा सो काटेगा रे  कह गये बूढ़ पुरनिया,

चक्कर काटेगा कितने ही  यही रहेगी दुनिया. 
स्वारथ ही सूझे  ऐसा भी स्याना मत बन भैया.

सिर कितना उधार का बोझा ,निपटे उतना अच्छा, 

लोभी मन का कौन ठिकाना लेता राम परीच्छा.
कुछ विचार ले ,कुछ सँवार चल, उड़ मत बन कनकैया.  
*

  

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (11-03-2017) को "फूल और व्यक्ति" (चर्चा अंक-2906) (चर्चा अंक-2904) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर ... दर्शन से भरी लाजवाब रचना ... जीवन क्या है .. क्यों हैं हम इस जीवन में क्या कर रहे हैं ... काश की सब कुछ राम भरोसे छोड़ पाते ... उसको अपना खेवैया बना पाते ... वो सब बातें जो सुनते आये बुजुर्गों से पर अमल नहीं किया जिन पर ... गज़ब की लेखनी है आपकी ...

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  3. बहुत ही सुन्दर पंक्तियां.

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  4. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' १९ मार्च २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीया 'पुष्पा' मेहरा और आदरणीया 'विभारानी' श्रीवास्तव जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।

    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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