मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

एक सोरठा भी..

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1. दही बेच री ग्वालिनी  इसे न देना छूट, 
    ये तो छलिया जनम का घट ही लेगा लूट. 
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2. सीवनहारे अस सियो कपड़ा फट-फट जाय,
    टाँका भर भी फाँक ना इस सीवन पर आय!
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3. वर्ण -वर्ण पर लिख गया तेरा ही तो नाम ,
    छुअत लेखनी रँग गई  ,हो गई मैं गुमनाम .
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4. ऐसा हुआ कमाल ,सभी पसंगा बन गया ,
    कोई पुरसा हाल, रहा न इस संसार में .
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5. हल्दी से रँग हाथ को सौंप दिया चुपचाप ,
   कौन करे बिसबास फिर,अब तक कोरा गात.
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6. वह चरचा मत ना करो मेरा जी अकुलाय,
    गहरी डूब समा गई अब तो साँस न आय.
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7. कुंज-बिहारी तुम कहाँ ,बन-बन डोलूँ टेर,
   उमर किनारे आ गई ,अब काहे की देर .
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(नं. 4. वाला छंद सोरठा है -शेष छह दोहे हैं. )

28 टिप्‍पणियां:

  1. वाह .. सभी मधुर ... ओर कुञ्ज बिहारी तो प्रेम, भक्ति ओर निर्वाण का गहरा भाव छोड़ता है ...

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  2. सार्थक और सुंदर
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

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  3. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    नवसम्वत्सर-२०७० की हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

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  5. माता जी संकलन हेतु मेल करें इस अपेक्षा के साथ प्रणाम स्वीकारें .....

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  6. अद्भुत सोरठे...गहन, सार्थक और सुन्दर...आभार

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  7. नवसंवत्सर की शुभकामनायें
    आपको आपके परिवार को हिन्दू नववर्ष
    की मंगल कामनायें

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  8. भाषा गत सौंदर्य भाव और अर्थ की अन्विति सोरठा समोए है बेहतरीन ताज़ी हवा सा है यह सोरठा .

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  9. बहुत सुन्दर आदरेया! बस ऐसे ही आशीर्वाद बनाए रखें!

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  10. बहुत सुन्दर लेखन आदरेया | पढ़कर आनंद आया | आशा है आप अपने लेखन से ऐसे ही हमे कृतार्थ करते रहेंगे | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  11. सुंदर दोहे सोरठे , खींचे सुंदर चित्र
    मनमें माखन मथ गये,अंतस् हुआ पवित्र ||

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  12. सुन्दर..अति सुन्दर..झुमा दिया आपने..मन में बज -सा रहा है ये दोहे और सोरठा..

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  13. बहुत ही सुन्दर ढंग से सोरठा विधा को पुनर्जीवित करती पोस्ट |आभार

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  14. शब्द ही नहीं हैं इन दोहों की प्रशंसा के लिए ...!!
    संग्रहणीय हैं ये सभी ...बहुत गहन और अत्यंत सुन्दर ...!!
    ह्रदय से आभार ...!!

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  15. आदरणीय प्रतिभा जी
    नमस्कार !
    ........सुंदर दोहे सोरठे
    जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ !

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  16. शकुन्तला बहादुर19 अप्रैल 2013 को 11:30 pm

    लाऊँ शब्द कहाँ से ,जो करूँ प्रशंसा तोर ।
    मैं तो बस निर्वाक् हूँ, हर्षित है मन मोर।।
    अद्भुत कवित्व !!

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  17. सुन्दर प्रस्तुति ..........आभार .!

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  18. woww !! :D
    kitte pyaare dohe hain :D ..aanand se mann bhar gaya...antim doha ek pathak ke taur par thodu sa gussa kar gaya...wahin use mehsoos karne par aanand vibhor kar gaya..bahut hi sehaj shaili me the dohe aur sortha to seedhe hriday tak pahucnhe...esp last wala doha :):)
    aabhaar pratibha jee !! shabon me bandhi hui is anand dayak anubhuti hetuu...:):):)

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